अम्मा
उन स्वप्नों ने, उन वचनों ने, अनुत्तरित प्रश्नों ने - आज पुनः अंतर्मन को झकझोरा है अम्मा!
तुम्हारी हथेली की थपकी ने, तुमने जो दी उस घुड़की ने- आज पुनः न जाने क्यों फिर टोका है अम्मा!
रजनी के अंधियारे ने; भोर के उजियारे ने- पुनः तुम्हारे स्पर्श की ओर खींचा है अम्मा!
परीक्षा की बेला में मेरे मन की इस चंचलता ने- पुनः तुम्हारे अनुशासन को तोड़ा है अम्मा!
कहने को तो आनंदित हैं, लक्ष्य पर सकेंद्रित हैं- पर जीवन के रीतेपन ने तुम्हें ही ढूँढा है अम्मा!

Kya baat hai bhai.. copyright material hai ya copy-right material hai..
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