Tuesday, August 3, 2010

जाना हो तो जाओ  !


जाना हो तो जाओ मगर कुछ पढ़ते- सुनते जाओ; मेरे भावों के उद्वेग को दो क्षण देखते जाओ।

तुमने मेरे मन में आशा का जो बीज बोया था अब पौधा हो चला है- जाना हो तो जाओ; जड़ों में मट्ठा देकर जाओ।

साथ तुम्हारे हुमको कुछ, लक्ष्य मिले; नए उद्येश्य मिले- जाना हो तो जाओ; नए ध्येय सुझाते जाओ।

तुम्हारी सहायता से अपना एक रूप, पीछे छोड़कर आए हैं - जाना हो तो जाओ सत्मार्ग दिखाते जाओ।

अब तक की सहयात्रा से अनेक मधुर स्म्रतियाँ जुड़ बैठी हैं - जाना हो तो जाओ; इनकी हत्या करते जाओ।

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